जिस खिड़की से हम देखते हैं-उप आदर्श : आत्मपरीक्षण-आदर्श: धर्म

The window through which you see- telugu

एक जवान दम्पति नई जगह रहने आया. अगली सुबह, नाश्ता करते हुए, नवयुवती ने अपनी पड़ोसी को धुले हुए कपड़े बाहर सुखाते हुए देखा . “उसकी धुलाई बहुत साफ़ नहीं है”,  उसने कहा.  “उसको ठीक से कपड़े धोने नहीं आते हैं. सम्भवतः उसे अच्छे धुलाई के साबून की जरूरत  है.” उस नवयुवती के पति ने देखा पर ख़ामोश  रहे.  हर बार जब उसकी पड़ोसी अपने कपड़े धोकर सुखाने डालती, वह युवा औरत इसी प्रकार से आलोचना करती थी.

एक महीने बाद, बाहर रस्सी पर साफ़ और स्वच्छ धुलाई देखकर, उस युवा औरत को आश्चर्य हुआ. और उसने अपने पति से कहा, “देखो उसने ठीक से कपड़े धोना सीख लिया है. मैं अचंभित हूँ कि यह उसे किसने सिखाया.”

पति बोला, ” मैंने आज सुबह जल्दी उठकर हमारी खिड़कियाँ साफ़ की हैं.”

जीवन में भी ऐसा ही होता है.  दूसरों का अवलोकन करते हुए, हम जो देखते हैं, वह उस खिड़की की शुद्धता पर निर्भर करता हैं जिसके द्वारा हम देखते हैं .

 सीख:

१) दूसरों के प्रति कभी भी आलोचनात्मक न हों.

२) जैसा चश्मा पहनते हैं, दुनिया वैसी ही दिखती हैं.  हमारे विचार, हमारी बातों में झलकते हैं.

३) दूसरों को आँकने या उनपर टिप्पणी करने से पहले खुद के अंदर झाँक लो

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