क्षमा करना अच्छा, भूलना सबसे अच्छा

आदर्श: प्रेम

उप आदर्श: क्षमा, दया

महान वैज्ञानिक आईसैक न्यूटन ने बीस वर्षों तक, प्रतिदिन कई घंटों काम किया और अपनी उत्कृष्ट खोज का परिणाम लिखा.

एक दिन खोज के पन्ने मेज़ पर छोड़ कर,वह सैर पर निकल गए. उनका पालतू कुत्ता ‘डायमंड’ कमरे में लेटा हुआ था. कुछ क्षणों में, वह खेल-खेल में, मेज़ पर कूद पड़ा. इस कारण हस्तलिपि की गठरी पर जलती हुई मोमबत्ती गिर गई और उसमें आग लग गई. बीस वर्षों की कठिन खोज, घड़ी भर में, राख हो गई.

जब  न्यूटन वापस आए तो चौंक गए.  उनके बेश कीमती कागज़ अब मुट्ठी भर राख थे. कोई और होता तो कुत्ते को मौत के घाट उतर देता. परन्तु न्यूटन ने कुत्ते के सर को सहलाया और उसकी ओर दयापूर्वक देखते हुए कहा, ‘डायमंड, तुम्हें नहीं पता तुमने क्या किया है.”

उन्होंने पुनः लिखना शुरू किया. उन्हें कार्य पूरा करने में कई वर्ष लग गए.  एक मूक पशु के लिए उनकी कितनी गहन सहानुभूति थी? न्यूटन का हृदय, उनके मस्तिष्क के समान, महान था.

सीख:

अपने प्रति हुए गलत को माफ़ करना मुश्किल है-  पर दृढ़ इच्छा से यह सम्भव है. पूरी कड़ी को भूलने के लिए अलौकिक प्रयास अवं उत्तम हृदय की आवश्यकता है.  अगर तुम माफ़ करने और भूलने की आदत विकसित कर लो, तो इस व्यापक संसार में तुम्हारा कोई भी शत्रु नहीं होगा.

तुम्हारा सभी से दोस्ताना रहेगा.  स्वामी विवेकानंद ने कहा, “जान लो कि दूसरों के लिए, एकांत में, बुरा बोलना पाप है.  तुम्हें सर्वथा इसका परिवर्जन करना चाहिए.  मन में कई चीज़े आती हैं, पर अगर तुम उन्हें प्रकट करने की चेष्टा करो तो वह धीरे-धीरे तिल का ताड़ बन जाता है. अगर तुम क्षमा करो और भूल जाओ तो सब कुछ वहीं अंत हो जाता है.

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